हर घर में यही कहानी है।
दूध लाओ, उबालो, और उम्मीद करो कि आज ठीक हो।
कभी पतला, कभी बदबूदार, कभी पीला। शिकायत करो तो जवाब मिलता है — "हमारे यहाँ यही मिलता है।" ज़्यादा पैसे दो तो भी वही। कम दो तो भी वही। बस हर बार उम्मीद टूटती है।
हमें बस इतना चाहिए था —
— ऐसा दूध जो बस उबालो और पी लो। बिना सोचे।
— जो हर दिन एक जैसा हो — कभी गाढ़ा, कभी पानी नहीं।
— कोई जिसे बोल सको "भाई, आज ठीक नहीं था" — और वो सुने।
बस इतनी सी बात थी। लेकिन यही सबसे मुश्किल थी।
यह Dhora को शुरू करने वाले की बात है —
शक्ति सिंह चौहान, नासिराबाद
फ़ौजी परिवार से हूँ। बचपन हर 3-4 साल में नई जगह गुज़रा। एक चीज़ हर जगह एक जैसी थी — अच्छा दूध नहीं मिलता था। माँ हमेशा परेशान रहती थी। कितना भी दाम दो, दूध में पानी आ ही जाता था।
पिताजी की रिटायरमेंट के बाद नासिराबाद में बस गए — करीब 14-15 साल हो गए। दूध की समस्या यहाँ भी वही रही। तो अपने घर के लिए गाय ले आया। माँ की समस्या — हल। लेकिन बाकी सबका क्या? इसीलिए Dhora है।
पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हूँ। 7 साल से काम कर रहा हूँ। लेकिन कुछ चीज़ें टेक्नोलॉजी से नहीं, भरोसे से ठीक होती हैं। Dhora उसी भरोसे की शुरुआत है।
Dhora का मतलब —
शुद्ध का मतलब शुद्ध।
मिलावट नहीं होगी। कभी नहीं। किसी भी दाम पर नहीं।
आपने पैसे दिए हैं, आपको उसकी पूरी कीमत मिलेगी।
न ज़्यादा, न कम। जितने का दूध है, उतना शुद्ध।
कभी भी आकर देख लो।
गाय देखो, दूध देखो, जांच देखो। कुछ छुपा नहीं है।
3 दिन आज़माओ। पसंद नहीं आए तो मत लो।
कोई बंधन नहीं, कोई सवाल नहीं। बस एक बार ट्राई करो।
हमें बड़ी-बड़ी बातें नहीं करनी। बस एक बार आज़माकर देखो।
मुफ़्त ट्रायल शुरू करें3 दिन का दूध, मुफ़्त। पसंद आए तो आगे बढ़ो। नहीं तो कोई बात नहीं।